स्मार्ट दूकानदार, मुस्कुराकर, अठन्नी वापस नहीं करता.. शायद फ़िक्र हो.. भिखमंगों की. नये कपड़ों की जरूरत लगातार बनी रहती है शायद फ़िक्र हो हमें, अधनंगों की. चीजें कुछ फैशन के लिहाज से पुरानी पड़ जाती हैं, इमारतों को फ़िक्र हो जैसे, नर-शूकरों की. मासूम बच्चे, उनके कुत्ते, नहलाते हैं; शायद फ़िक्र हो उन्हें, अभागों की. [...]




आपने फ़रमाया...