Archive for अक्टूबर 28th, 2009

….वो लड़कियां

“पाँव ;फूल पर आ गया , क्योंकि वो ‘गिरा’ हुआ था. …… पर ये ख़ुद तो नही गिरा होगा . .. इसका सौन्दर्य ,इसका घाती. तोड़ा…; पर सजाया नहीं इसे कहीं. … मुरझाना-सूखना तो सहज था; पर इस तरह,रौदा जाना ….. ,,… किसी ने इसे रास्ते में गिरा दिया. ..,,,..   ‘ठीक उन लड़कियों की [...]

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