Archive for अक्टूबर 14th, 2009

पहले पन्ने की कविता…

लिखूं, कुछ डायरी के पृष्ठों पर कुछ घना-सघन, जो घटा हो..मन में या तन से इतर. लिखूं, पत्तों का सूखना या आँगन का रीतना कांव-कांव और बरगद की छांव शहर का गांव में दबे-पांव आना या गाँव का शहर के किनारे समाना या, लिखूं माँ का साल दर साल बुढाना कमजोर नज़र और स्वेटर का [...]

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